Mysterious Kailash Temple

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Cave of Ajanta Ellora


The cave of Ajanta Ellora is located near the city of Aurangabad in Maharashtra! These caves are made by cutting large rocks. The 29 cave is located in Ajanta and 34 caves in Ellora! These caves have been preserved in the World Heritage! The cave of Ajanta Ellora is world famous. The statue of idols is beautiful and the flowing river Vaghora increases the charm of all the caves!

Ajanta Caves

Ajanta Cave has situated to the north of 101 km away from Aurangabad! Located on the hills of Sahyadri, these 29 caves carry about 5 Prayer halls and 25 Buddhist monasteries! These caves were discovered in 1819 by the army officer John Smith and his companions, after which caves became world famous. These caves are in the shape of horse cord and are very ancient. They have been depicted from 200 BC to 650 AD after Buddhist religion! Carving of beautiful angels and princess are done on the caves!

Cave of Ellora

It is located 30 km away from Maharashtra, Aurangabad! It was built in the eighth century by King Krishna Purana of  Rashtrakuta dynasty, which included 34 caves in the cave of Ellora! This cave is made on the edge of the ballistic footage! In these caves, the triune confluence of Hindus, Buddhists and Jainism is confluence! This cave has come into existence from 350 to 700 AD. Of these, 17 caves for Hindu religion, 12 caves for Buddhist religion and 5 caves are based on Jainism! But all of these caves will talk about number 16, which is very different and amazing!

Kailash Shiv Temple

Cave number 16 Kailash Shiva Temple! It was composed about 6,000 years ago, and some believe that it was done 1200 years ago. According to the way the temple has been built, there is a myth that this temple is not built by any person, this temple is made of some divine power! For example, to build any stone building or temple, stones are kept one above the other and in this way it takes shape! But Kailash Temple is the only temple in the world that has been cut into a single piece by cutting a rock. And the use of cut in technique is used to make any stone building, but the opposite cutout method has been used here!

The speciality of this temple is that this temple was built by cutting the same rock and also from top to bottom. According to the archaeologist, about 4 lakh tons of stone had been removed from this temple and
it took many decades to remove and cut stones, but according to the history, they took only 18 years to create this temple! If counted, to remove 4 lakh tons of stone, every year 22222 tonnes of stone will be
removed and accordingly, 60 tons of stone every day and 5 tons of stone per hour. Which is also impossible in today’s technology world, at that time it was not possible at all. In this temple, the first ditch of 90 meters was dug, and after this, the second ditch of 53 meters was dug and mixed. The shrine of 30 meters was constructed in the temple. This temple is divided into 4 parts. The first is the entrance gate which opens in the spacious courtyard. The second part is the temple itself. Amazing carving is done in it. The third part is the Nandi Chabootra and the fourth part is the residence for those who live here. This temple depicts Ramayana in the south, the story of the Mahabharata in the north, and in the bottom, the picture of Krishna Leela has been depicted. There is huge Shivling in the sanctum of the temple. There are more than 100 caves in this temple, 34 of them are open to tourists. There are many caves in the heart of the temple, which is mysterious.

It is said for the Pyramid of Egypt that any power was used in power, it is said that similar power has been used even for Kailash temple. The 4 million tons of stone extracted from this also does not appear far to meet its surroundings.

In 1682, the ruler Aurangzeb, who sent 1082 soldiers to the order, broke it, but even after three years, he
could not break it, he also accepted the defeat and called his soldiers back. Kailash Temple, which is still famous for its texture and artwork around the world, and still has no understanding of the riddles of this temple.


अजंता एलोरा की गुफाए

अजंता एलोरा की गुफाए महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के समीप स्थित हे! ये गुफाए बड़ी बड़ी चट्टानों को काटकर बनाई गई है।  २९ गुफाए अजंता में और ३४ गुफाए एलोरा में स्थित है! इन गुफाओ को वर्ल्ड हेरिटेज में सरक्षित किया गया है! अजंता एलोरा की गुफाए विश्व प्रसिद्ध है यहाँ की मूर्तियों की नकाशी लाजवाब है और यहाँ बहने वाली वाघोरा नदी इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगाती है!

अजंता की गुफाऐं

औरंगाबाद से १०१ किमी की दुरी पर उत्तर में अजंता की गुफाए स्थित है! सहाद्रि की पहाड़ियों पर स्थित इन २९ गुफाओ में लगभग ५ प्राथना हॉल और २५ बौद्ध मठ हे! इन गुफाओ की खोज १८१९ में आर्मी अफसर जॉन स्मिथ और उसके साथिओ द्वारा की गई थी उसके बाद ये विश्व प्रसिद्ध हो गई। घोड़े के नाल के आकार में निमित ये गुफाए अत्यंत ही प्राचीन है! इनमे २०० इसा पूर्व से ६५० इसा पश्चात् तक के बौद्ध धर्म माँ चित्रण किया गया है!  इसकी गुफाओ में सुंदर अप्सरा और राजकुमारी के चित्रण किये गई है!

एलोरा की गुफाए

महाराष्ट्र, औरंगाबाद से ३० किमी की दुरी पर ये स्थित है! इसको आठवीं सदी में राष्ट्रकूट वंश के राजा कृष्ण प्रथमने बनवाया था एलोरा की गुफाओ में ३४ गुफाए शामिल है! ये गुफाए बैलेस्टिक की पहाडिओ के किनारे बनी है! इन गुफाओ में हिन्दू, बौद्ध, जैन धर्म के प्रति आस्था का त्रिवेणी संगम हे ! ये गुफाए ३५० से ७०० इसा पश्चात अस्तित्व में आयी है! इनमे से १७ गुफाई हिन्दू धर्म, १२ गुफाए बौद्ध धर्म, और ५ गुफाए जैन धर्म पर आधारित है! लेकिन इस सब में से गुफा नंबर १६ की बात करेंगे सो इन सबसे अलग और अद्भुत है!

कैलाश शिव मंदिर

गुफा नंबर  १६ कैलाश शिव मंदिर हे! इसकी रचना करीब ६००० साल पहले की गई थी तो किसी का मानना है की १२०० साल पहले की गई थी। जिस तरह से इस  मंदिर की रचना की गई है उस हिसाब से यहाँ एक मिथ प्रचलित है के ये मंदिर किसी इंसान द्वारा नहीं बनाया गया है ये मंदिर किसी दैवी शक्ति से बना है! जैसे की किसी भी पथ्थर की इमारत या मंदिर को बनाने ने के लिए पथ्थर के ब्लॉक्स को एक के ऊपर एक रख्खा जाता हे और इस तरह से वो आकार लेता है! परन्तु कैलाश मंदिर दुनिया का एक मात्र ऐसा मंदिर हे जिसे एक पथ्थर को काटकर सिंगल पीस में बनाया गया हे! और किसी भी पथ्थर की ईमारत को बनाने के लिए कट इन टेक्निक का उपयोग होता हे पर यहाँ पर उसके विपरीत कट आउट पद्धति का उपयोग किया गया हे!

इस मंदिर की विशेषता ये है की इस मंदिर को एक ही पथ्थर को और वो भी ऊपर से निचे तक काटकर बनाया गया हे! इस मंदिर को बनने में करीब १८ साल लगे है उस हिसाब से आर्कियोलॉजिस्ट के अनुसार इस तरह मंदिर बनाने में करीब ४ लाख टन पथ्थर निकाले गए होंगे और इतने पथ्थर हटाने और काटने में कई दशक का समय लगता हे पर इतिहास के अनुसार ये काम सिर्फ १८ साल में हुआ है! अगर गिनती की जाए तो ४ लाख टन पथ्थर हटाने के लिए हर साल २२२२२ टन पथ्थर हटाने होंगे और उस हिसाब से हर रोज ६० टन पथ्थर और हर घंटे की हिसाब से ५ टन पथ्थर। जो आज की टेक्नोलॉजी की दुनिया में भी नामुमकिन सा है तो उस समय तो मुमकिन ही नहीं था।

इस मंदिर में सबसे पहले ९० मीटर की दो खाई को खुदा गया इसके बाद ५३ मीटर की दूसरी खाई को खोदा गया और मिलाया गया। ३० मीटर के शिलाखंड को तरास के मंदिर का निर्माण किया गया। इस मंदिर को ४ भाग में विभाजित किया गया हे। पहला जो प्रवेशद्वार हे जो विशाल आंगन में खुलता हे। दूसरा भाग स्वयम मंदिर हे। इसमें अद्भुत नकाशी की गई हे। तीसरा भाग नंदी का चबूतरा है और चौथा भाग यहाँ रहने वालो के लिए आवास स्थान। इस मंदिर में दक्षिण में रामायण, उत्तर में महाभारत की कथा का चित्रण किया गया है और निचे की और कृष्णा लीला का चित्रण किया गया है।  मंदिर के गर्भगृह में विशाल शिवलिंग है। इस मंदिर में १०० से ज्यादा गुफाऐं है जिसमे से ३४ ही पर्यटक के लिए खुली हे।  मंदिर के निचे की बहोत सारी गुफाऐं है जो की रहस्यमई है।

मिस्र के पिरामिड के लिए कहा जाता है की किसी परग्रह शक्ति का उपयोग किया गया था ऐसे ही कैलाश मंदिर के लिए भी किसी शक्ति का उपयोग किया गया हे ऐसा कहा जाता है। इससे निकाले गए ४ लाख टन पथ्थर भी इसके आसपास मिलो दूर तक दिखाई नहीं देते है।

१६८२ में उस समय के शासक औरंगज़ेब ने १०८२ सैनिको को भेजकर इसे तोड़ ने का आदेश दिया था पर तीन साल के बाद भी इसे तोड़ नहीं पाए तो उसने भी हार मानकर अपने सैनिक को वापिस बुला लिया।

कैलाश मंदिर जो आज भी उसकी बनावट और कारीगिरी के लिए दुनिया भर में मशहूर है और आज भी इस मंदिर की पहेलियों को कोई समज नहीं पाया है।

 

12 Comments

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